नै घरके नै घाटके

समाचार


लिखु नै लिखु ? बेर- बेर यै बारे दिमागमे बातसब उकुसमुकुस हैत रहलै, नै कुछो लिख ओहिनङग रुइक गेलियै । ई लिखैले बहौत दिन लागलै । विषयवस्तु जटिल भ्याके नै कि, बलकी द‍ोसरके मन दुखाइतै आ बदलैत लबका समाजके अर्थात लबका पुस्ताके । मनमे एयाल बिचारके पहिने समाजिक संजाल फेसबुकमे स्टाटस लिखलियै । तब साथीसुनके रंगबिरंगके बिचार कमेन्टमे बुझललियै ।

लडका लडकी बीचमे घरवाला घरवालीके सम्बन्ध कायम कराइबला धार्मिक आ समाजिक कर्मके वियाह कहैछै । छोटेसे वियाह एकटा एहेन चरण चियै, जैसे सबगोराके गुज्रे परैछै । लडकीसबके ( छौरीसबके ) वियाह बिनाके खुशी, सुखके कल्पना जीवन से हटयाल जाइछै । पितृसत्तात्मक समाजके संरचनामे लडकीसबके कहल जाइछै वियाह ओइसुनके जिवनके महत्त्वपूर्ण चरण चियौ । बाल्यकाले से ( छोटेसे ) लडकीके वियाहके लेल तयारी करैछै अर्थात वियाह करनाई जरुरी हैछै सिखाइछै । आपन समाजमे बनाएल चलन अनुसार चलैले नैसकल अवस्थामे लडकीके वियाह नै हैछै महशुस कराई छै ।

पहिनका जमानामे वियाह करैके लेल पुस्तौपुस्ताके करकुटुम, नातागोताके गोष्टि ( खोजतलास ) फरयाइत रहै । बेसी नहियो त तीन पुस्ता तकके खोजीनिती करबेटा करै मगर आइकोल त अन्तरजातीय अर्थात आन आन जाइतो से करल वियाह मान्यता पाबैले लागल छै । अन्तर्जातीय वियाह लडका लडकी फरक फरक जाइतके बीचमे हैबला वियाहके कहैछै ।

जाइत शब्द ‘संस्कृत’के जात’से एयाल मानैछै त, थर वास्तवमे निश्चित व्यक्तिके पारिवारिक परिचय रहल मानल जाइछै । जाइतके अर्थ हैछै ‘जन्मल ’ आ जन्म लैबला व्यक्ति, जनावर, किरा-फटेङग्रा जै योनिमे जन्म लैछै ओहै जीवके देह (शरिर) धारण करैबला जाइत मानै छै । योनिके दुइटा अर्थ हैछै । महिलाके प्रजनन अंग ओैर जीव धारण करैबला शरीर । वर्णाश्रमके आधारमे बरका, छोटका, निचला, उपरका कैहके छुटयाइबला समुहके जाइत कहैछै । तहिनङ थर पुरुष से सन्तानमे जाइबला पितृसत्तात्मक परिपाटीके कारण थर यथार्थमे पुरुष वंशगत लहरके रुपमे एक पुस्ता से दोसर पुस्ता तैक जाइछै ।

अन्तरजातीय वियाह करलपर लडकी कोन जाइतके थर लिखतै त ? फेसबुकके सवालमे प्रकाश खतिवडा , नेपाली बन्धु, विनय कर्ण, रुपेश यादव, इन्दुमाया यादव, विद्यानन्द राम, सुरेश राय, रामसुन्दर यादव, प्रतिमा चौधरी , चन्द्रकला चौधरी , प्रवेश मिश्र, बिकाश झा, सत्यनारायण चौधरी , शिव महरा, लक्ष्मी चौधरी, भुलाई चौधरी , बुद्वसेन चौधरी , बृजमान तामाङ लगायतके व्यक्तिसबके धारणा एलै लडकी आपन इच्छा चाहना से लिखैले पाबतै । लडकीके निर्णयमे भर परैछै। बदलैके कोनो करचाप नियम कानुन, बाध्यता नै छै । त ककरो धारणाा रहलै जाइत दुइटा मात्रै हैछै । महिला, पुरुष ।

जैमे बृजमान तामाङके अनुसार तामाङ समुदायमे कोन थरके महिला चियै ओकर लैहरा थर कायम रहै छै। ई परम्परागत जातीय कानून सोहो चियै ।

तहिनङ बुधसेन चौधरीके जानकारी मुताबिक जाइत ओैर थर अलग बात चियै । कोन सन्दर्भमे प्रयोग हेतै ओहै अनुसार अर्थ फरक फरक भ्यासकै छै । पुरापूर्वकाल से पुरुष प्रधानता भेला से समाजमे महिलाके पहचान पुरुषसंगे जोडल रहै छै । वियाह हैसे पहिने बाबुके ओैर वियाहके वाद घरबलाके थर प्रयोग हैत एयाल छै । मगर यै सम्बन्धमे मुलूकी देवानी संहिता,२०७४ के दफा ८१ मे थर प्रयोग सम्बन्धि व्यवस्था रहल छै । जैमे उपदफा १ मे विवाहित महिला विवाह बाद बाबु ओैर मैयाके प्रयोग करल थर आ निजके घरबलाके थर आ दुनु थर प्रयोग कैर सकैके उल्लेख करने छै त, उपदफा २ मे विवाहित महिलाके थर सम्वन्धमे कोनो प्रश्न उठलमे अन्यथा प्रमाणित भेलमे निज आपन घरबलाके थर प्रयोग करल मानै छै । यदि घरबलाके प्रधानता देखाइले चाहै छै त उपदफा ३ मे घरबलाके थर प्रयोग करल महिलाके सम्बन्ध बिच्छेद भेलमे निज चाहलमे निजके बाबु आ मैया प्रयोग करल थर प्रयोग करैके स्वतन्त्रता सोहो देने छै । अखैन बिचार ओैर स्वतन्त्रता दुनु सुघारोन्मूख रहल छै ।

तहिनङ भुलाई चौधरीके मोताबिक ओकर अनुभवमे तराईके जाइतसुनमे जाइत हैछै । प्रायह लडकीसुन दोसर जाइतसंगे वियाह नै करैछै । मगर पहाडी जाइतसुनमे लडकीके जाइत नै हैछै । जे जाइतके लडकासंगे वियाह हैछै ओकरे जाइत मानैछै । उपरका आ निचला जाइतके हिसाब नै हैछै । यकरा समाजमे आशानी से पचाइने छै । तराईमे विवादरहित बनाइले सकल जतेक आपन आपन जाइतमे वियाह करे परैछै । उ आपन कार्यालयके घटना बारे जानकारी दैत कहने छै, एकटा महिला साथी प्रश्न करलकै” सर महिलाके जाइत हैछै कि नाई ? जवाफ देलियै नै हैछै । उ रिससे फाइर भेलै उ महिला कहलकै ई कार्यालयके भुलाई सरके खौब मानदान करै चियै । तैदुवारे मनचित नै बुझल बात हम सरके पुछै चियै मगर सर कहियो काल बहुल्याल जखा जवाफ दैछै । त हम कहलियै त नै पुछ न । बहुल्याल जवाफ नै न सुने परतौ । यतओमे सबगोरा अलग अलग भ्याके आपन आपन घर दिसन चैल गेलियै ओइ दिन । विचारी रिस से जनजन करै छेलै । भात खाइ बखत फेर वेहयाबात कि हम कार्यालयमे चौधरी सरके पुछलयै बहुल्याल जखा जवाव देलकै कि नै हैछै । ससुर बा सोहो जवाव देलकै ठिके त जवाव देलकौ । लडकीके जाइत हेतियै त तु कार्की से भण्डारी कनङ भेलही ? ताब बल्ल साथीके चित बुझलै । तकर बेहानके कार्यालय पुइगते मातर हमर लग माफी मांगलकै, भुलाई चौधरीके कहब रहल छै ।

हम आपने भोइग रहल चियै । कृषि तथा पशुपञ्छी बिकास मन्त्री मृगेन्द्र कुमार सिंह यादव dairy development corporation ( DDC) दुग्ध बिकास संस्थान लैनचौर काठमाडौंमे हमरा सदस्य पदमे मनोनयन करने छेलै । ओकर सचिवालयसे ह्मवाटसपमे सिफारिस पठाएल कुछे दिनमे मन्त्री पदसे हैइट गेलै । मन्त्री हटते मातर हमर राजनितीक नियुक्ति सोहो खतम भ्पयागेलै । कथिले कि हम नियुक्ति करल चिठी लैले नै पाबने छेलियै ।

तकरबाद नेपाल पत्रकार महासंघ शाखाके सदस्यीयता शुद्धीकरण अभियान सुरु भेलै । खाइएले नै पाबल बिखके आरोप लग्याके राजनिती कैर हमरा शुद्धीकरणमे पारल गेलै । जखन डीडीसीमे मनोनीत भेलयै पत्रकारके शुद्धीकरण अभियान सुरु नै भेल छेलै । जब अभियान सुरु भेलै तखन मात्रै नै कि जहिया से जागिर छोइरके पत्रकारिता सुरु करलयै तहिया से हम निरन्तर रहल चियै । ताबो शुद्धीकरण हमरे उपर कथिले ? सप्तरी जिल्लामे महासंघके सदस्यीयता पाबल एसगर थारु पत्रकार भेला कारण कि ? हमरे जरे पत्रकारिता सुरु करल साथीसब जिम्मेवार पदमे पुइग सकलै मगर हम त १३ हम बर्षमे सदस्यये बनैके अबसर पाबलयै । शुद्धीकरण अभियानके बखत फेसबुकमे हमर बिरोधमे कुछ व्यक्ति स्टाटस लिखकै । प्रिया पत्रकार नै चियै कलाकार चियै । बादमे पता लागलै अपना खुइलके लिखैले नै सकलकै त आसेपासे, नातागोताके लिखैले लगाइने रहै ।
पत्रकार कहैछै पत्रकार नै चियै, कलाकार कहैछै कलाकार नै चियै, समााज कहैछै गाममे नै रहलै, हम कि करलयै ? कते।रहलियै ?
आब कनिक नेताके बात सोहो करु ? जिम्मेवारीके बातमे हमर ठामके चियै यते खटे परतै । मगर जब अधिकार पाबैके बात येतै त सप्तरीया कहलक सिरहाके चियै । सिरहा कहलक सप्तरीके चियै । हम कतेका चियै ?

लोकके नजरके जाति आ पार्टी दुनुको साथ सहयोग छै । लेकिन कोनो लाभके लेल जाति कहलकै आपने जातिके देबे नै मिलतै । पार्टी कहलक आपने ठामके नैमिलतै । हमर नाममे मात्र लागु भ्याल सुनलयै, देखलयै, भोगलयै । संगठनमे नै रहल व्यक्तिके ताइक ताइकके लाभ दयाल गेलै । हैतहैत हमर सम्पादक पदमे भि सवाल ? कोन बिधि बिधानमे लिखल छै एकटा काम मात्र करैले मिलै छै ? हँ, यदि छै त पत्रकार किया राजनितीक संगठनमे लागैछै ? पत्रकार स्वतन्त्र हेबाके चाही न ? हमर बुझाइमे स्वतन्त्र हैके चाही । हम कोनो पार्टीके संगठनमे नै छेलियै त १२ बर्ष तक महासंघके सदस्यीयता नै भेटलै । तखैन हमर हकहितके लेल बाजबैला कोन दोगमे ढुकल छेलै ?

कोनो भि लाभ, सुविधामे महिलाके सवालमे अन्तरजातीय वियाह करल लडकी पााइबरहल छै । दलित, मधेसी, थारु कोटामे देखि न । प्रायः थारु कोटामे त झन अन्तरजातीय वियाह करल पाइब रहल छै । अमेरिका गेल लोकसब ओतेके नागरिक बनैले पाबने छै लेकिन राज्यकीय पदमे रहैके अधिकार त नैदेने छै । मगर थारुसब त आपन बिरासत दयारहल छै तैदुवारे अन्तरजातीय वियाह करनाई ठिक छै । कमसेकम दुनु दिसनके अवसर त पाबैछै ।

दुनियाँके नजरमे जे रही आपन लेल बहुप्रतिभाशालिन चियै । जते रहलियै, जे करलयै निक करलयै । हमरा हमर परिचय से चिनहै छै, अहया बरका छै । हमर कामसे बाप सन्तुष्ट ओर गर्व करैत रहै । त्या हम, हम चियै यहैमे खुशी चियै ।

महताइर आ बापके तुलना नै हैछै । दुनुके भुमिका आपन आपन रहैछै मगर निसन्देह जैविक भुमिका महताइरके बेसी हैछै । शारीरिक संरचनाके आधारमे महिला ओर पुरुषमे हैबला फरक जिम्मेवारी से मुक्त हैले त नै सकै चियै मगर ओहे जैविक फरकके आधारमे करैबला राजनीतिक, सामाजीक, सांस्कृतिक विभेद से मुक्त हैले सकना चाही । सन्तानके पहिचान दैले हम बाबु चियै, उ हमर सन्तान चियै कैहके पुग्तै लेकिन महताइर आपने जन्मेलोपर नै पुग्तै ?
जब लडकी जाइतके जिम्मेवारी निभाइके बात एतै त दुई गाम समाज, दुई परिवार , दुई घरके इज्जत चिही अभास कराइतै लेकिन जब अधिकारके सवाल एतै त नै घरके, नै त घाटके जखा ….,………