आदरणीय मित्रसब
गाेर लागै ची । आई एकटा साभार कबिताके स्वाद लिय ।
आहवान
भुलाई चाैधरी, अध्यक्ष, था.भ.सा.केन्द्र नेपाल
हे, हमर थारू महारथी सब
आबाै सैब दिन
कतेक फजहैत हैत रहबिही -२
दुस्मन सब,
धन लेलकाै
जमीन लेलकाै
मान लेलकाै
सम्मान लेलकाै
आब जान ल्यारहलछाै-२
आबाै जाब नै चेतबिही
त चेतबिही कहिया ?
यदि आबाै नै चेतबिही
त बुझु जे
डबरेके पाइन लखा
वहै डबरामे सैरगैलके
ओराबे परताै -२
कहै चिही काेई हम राजनेता चियै
कहै चिही काेई हम विद्वान चियै
कहै चिही काेई हम चलाक चियै
मगर ककराे कहाँ देखाै चियाै
आगु हैत -२
दिने दिने दुश्मनसब
दिवारे कीरा नहाइत
खेने जाईछाै – २
ककराे काग्रेस बन्याके ठगलकाै
त, ककराे एमाले बन्याके ठगलकाै
एहनं सबके
फुट्या-फुट्याके
अपनामे लडा-लडाके
ठग सब ठगलकाै -२
आबाै छाेड सब काेई यी झुठ अभिमानके
या सब महारथी एक हेब
एकते मे बल छै-२
जब हम सब एक नै हेबै
त, सब दिने दिन कमजाेरे हेबे
या, दुश्मनसब काइल घरवार बिहिन बन्याके
हमसबके ओरया देतै-२
अखनी ठिक समय येलछै
अकरा सब काेई मिलके
बनाब आपन हथियार
ताेराेसबके निक हेतअ
आ हेतै थारूके उद्धार -२ ।।
