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थारू के चियै?
थारू यै थरुहटके आदिपुरुष,आदि मानव, शाक्य काेलिय वंशी, आदिबासी, भूमिपुत्र, मूलबासी, अनार्य, प्रिआर्य तथा मंगाेल्याइड मूलके चियै ।
यै पृथ्वीमे मानव उत्पति तथा विकास इतिहासके क्रममे इतिहास साक्षी छै कि अखनी तैकके जानकारी अनुसार मानवके यै पृथ्वीमे पहुनका पिथेकस अफ्रिकाके इथाेपियामे प्राप्त भेलरहै जे प्रमाणित करैछै कि मानवके उत्पति यै ठाममे आइसे १ कराेड ४० लाख वरिस पहिने नेग्राे समूह रुपमे भेल रहै । तेहनं दाेसर समूह ८० लाख वरिस पहिने मानवपिथेकस रुसके ककेसिया स्थानमे प्राप्त भेल रहै जै समूहके यूराेपियन समूह कहै छै । यहनं तेसर समूह एसियाके नेपाल देशके बुटवलके दाेभानसे प्राप्त भेलछै । जे रामा पिथेकसके नामसे जानल जाईछै । अकर समय १ कराेड १० लाख वरिस पुर्व मानल जाइछै । यै पिथेकसके एसियन समूह सेहाे कहैछै । यै समूहके इतिहासकारसब मंगाेल मावन समूह अर्थात् मंगाेल्याइड सेहाे कहैछै ।
वैज्ञानिक खाेज अनुसंधान या डी.एन. ए. परीक्षण अनुसार नेपालके थारू समूदायके यै बुटवलवला रामापिथेकसके सबसे लगके मानव चियै से साबित करने छै । यी समूह आई विकासके विभिन्न उतार-चढाव या परिवर्तन समस्याके सामना करैत यै एसियन भूभागमे खास क्याके भारतीय उपमहाद्वीपमे आई थारू रुपमे विकसित भेलछै । यै भुभागके यतेका मानवरुप इतिहासकार अनुसार अन्त अन्त तैकमे इच्छवाकु, ओकाका ओकामुखा शाक्य काेलीयसे विभिन्न उतार चढाव सामना करैत अखन थारूरुपमे माैजुद देखैमे आबैछै । पहिनेके रामा पिथेकससे या वाेकर बंसज अखनीके थारू नामसे सम्बाेधित छै । यी अखनीके थारू अखुनका जनमलहा काइलके पूर्वजके नहाइत सबके एक सुत्रमे बांधैके रुपमे प्रयाेग भेल छै ।
ई पूर्वके रुपमे थारू के पिथेकस अन्य अन्य नामसे ओर अन्य कबिलाके रुपमे सेहाे विकसित भेल हेतै यी स्वभाविक छै । जे थप अध्ययन अनुसंधानके विषय भ्यासकैछै । यैठना यी थारू सभ्यताके रुपमे इक्छवाकु सभ्यता, ओेकाका-ओकामुखा सभ्यता, सिन्धु सभ्यता, शाक्य- काेलीयसे ल्याके अखुन्का थारू सभ्यताके एक दाेसरके प्रयायवाची रुपमे ल्यासकै चियै । खास क्याके पूर्वके थारू सभ्यता बुद्धकालमे आैर अखुन्का कालमे समय परिस्थिति तथा नव आगन्तुक लाेग सब (ककेसियन वा यूराेपियन समूह) के कारण थारू सभ्यतामे कुछ खिचातानी नै भेलै से नकारल नै ज्यासकैछै । तैयाे निकसे विचार करने से अखैनियाे थारू संस्कृति एकटा बलगर सभ्यताके रुपमे प्रत्यक्ष रुपमे बरहैत आइब रहल देखैमे आबै छै । क्रमस…..