घरमे रही आर्थिक चाप बिदेश जाई घरनी टाप

समाचार

प्रिया सिंह थारु

युवाके उमेर समुह फरक फरक रहल छै । अधिकांश देशमे युवाके उमेर १५ बरिष से  ल्याके  ३५ बरिष बीचमे कायम करने छै । संयुक्त राष्ट्रसंघ लगायत अन्तर्राष्ट्रिय संस्थाद्वारा १५ बरिष से ल्याके २४ बरिषके उमेर समूहके युवा मानने छै त नेपाल देशके सन्दर्भमे राष्ट्रिय युवा परिषद् ऐन, २०७२ या अन्तर्राष्ट्रिय युवा नीति २०७२ के मोताबिक १६ बरिष से ल्याके ४० बरिषके युवाके उमेर समूह निर्धारण करने छै ।

नेपालमे कानूनी रुपमे  वियाह करैके लेल लडका ओैर लडकीके उमेर २० बरिष  पुगल होना चाही व्यवस्था रहल छै । २०७४ मे जारी भ्याल मुलुकी देवानी संहिता २०७४ के मोताविक नेपालमे वियाह करैके उमेर २० बरिष ठेकने छै । यैसे पहिने लडकाके उमेर २० बरिष आ लडकीके उमेर १८ बरिष ठेकने छेलै ।

नेपालमे युवा विदेश पलायन धमाधम बाहार जेनाइ दुखके बिषय बनल छै । आपन देश छोइरके बाहार पलायन भेनाई दुखद बिषय बनल छै । देश छोइरके बिदेशमे काम करैले जेनाई आ ओनै रहनाई युवासबके संख्या बैढ रहल छै । दिनदिने हजारौं युवा आपन मुलुक छोइर अवसर आ रोजगारीके लेल मात्रै नै ,  बलकी पढाइ आ कामके बहानामे बिदेश जाइके संख्या ओतबे रहल छै त, दोसर दिसन देशोमे रहल युवासब निराशजनक अवस्थामे रहल देखा पैर रहल छै।
देशके अवस्था परिवर्तन भेलै लेकिन व्यवस्था परिवर्तन कहिया हेतै ओइ आशमे युवासब टकटक बाट ताइक रहल छै । कृषि  प्रधान देशसे प्रसिद्ध रहल नेपालमे बेरोजगार युवाके चाङ होनाई कतेक दुखद बात चियै ?

जनकपुर चुरोट कारखाना, सुनवल चिनी मिल, हेटौंडा सिमेन्ट फ्याक्ट्री, हेटौंडा कपडा उद्योग , बिराटनगर जुट मिल, हेटौंडा  कोल्गेट फ्याक्ट्री, उदयपुर सिमेन्ट फ्याकट्री, बाँसबारी जुत्ता , भिडकुटी कागज कारखाना  आदि जखा कलकारखाना बन्द भ्यालके कारण बेरोजगारी बरहलै अरे ! आब लबका सरकार खुल्ला करतै त रोजगारी पाबतैके आशमे रहल देखल जाइछै । कि  पहिने इ कलकारखाना चैलरहल छेलै त युवा नै बिदेश पलायन हैत रहै  ? हँ कुछ हद तैक संख्याके कमी छेलै । लेकिन बिन बिदेशके त नै छेलै न ।

आपन देशमे रोजगारी नै भेटत आ भेटबो करैछै त पारिश्रमिक समयमे नै दैछै । हम आपने बात करी त सेभ द सप्तरी एनजीओ पर मात्रै समयमे पुरा तलब पाबलु बाकी कोन क्षेत्रके बात करु भोरुकवा एफएम, छिन्नमस्ता एफएम , शिवान्शु एफएफ ,बोर्डिङ स्कुल सबमे आधाछिधा कहियो देलक त कतेक नै देलक आ भक्तपुर इन्टरनेशनल होस्पिटल भितर फिजियो थेरापिस्ट डा.दिलिप यादवके बात कहु त लाजमर्दो लोक सिख लैछै छोइर दैछै दोसरके बदखाई सुनाबैत रहै जब सातम महिना  बितल त हमरे सामने दोसर स्टाप खोजी करै छेलै तब हम मनेमन सोचयै हमर तलब नै दया रहल छै या स्टाप खोजैके बात करैछै हमरा मनमे शंका उब्जे लागल, तब हम तलब मागलु त समय नै दैछै अरे दुुनियाके हमरे बदखाई सुरु करे लागल । आपन देशके स्थिति एहेन छै । युवासबके यहीँ चलते बिदेश पलायन हैले परैछै ।

नेपालमे बेरोजगार समस्या छेबे करल छै । रोजगारी पाबलोपर समयमे पारिश्रमिक नै पाबैछै यी देखल मात्र नै, बलकी हमर भोगाइ सोहो चियै । सुरुमे आँइख अस्पताल जलेश्वर, निजी बिधालयमे सोहो काम करलयै तकर बाद एफएमसबमे काम करलयै, अनलाइन मिडियासब, पत्रिका, टिभी लगायत बिभिन मिडियामे काम करलयै पारिश्रमिक नै पाबैके समस्या भोगबे करलयै ।

मिडियामे एहेन समस्या छै बरु फेनसे अस्पताल दिसन लागैैले सोच बनाइलयै । सनजोग से महोतरी जिल्लाके फिजियो थेरापिस्ट डाक्टर दिलिप यादवसँग चिनजान भेलै । ओकर सँगे भक्तपुर इन्टरनेशनल होस्पिटलमे सात महिना काम करलियै ओतौ ओहे दशा । टका पैसा नै मागलयै तब तक हम बड निक लेकिन जब हमरौके बिच भ्याल सम्झौता अनुसार श्रम करलहा पारिश्रमिक मागलयै त हम भ्या गलयै बहौत खराब । हम महिला एहन समस्या भोगलयै त पुरुषसब कनङ नेपालमे काम कैर आपन घरपरिवार चलाइतै ? 

महिलासबके कथा बेथा अलगे छै ।  हम नया नया लबका कनिया छेलियै । भोइर गाममे हमर टोलमे हमरेटा घरमे टेलिफोन छेलै । टोल भोइरके ककरो फोन आबै त बोल्या दैले परै छेलै । प्रायः हमर परोसिया महिलासबके घरबाला बिदेशमे रहै । बिदेश से फोन आबै त हम आपन भगिनाके बोल्या दैले पठाई छेलियै ।  सोस,ससुर, पुतौह पुरा घरपरिवार मिलके आबै । सौस,ससुरके सामने कोन बात करतै सब ठिके छै कहै ।  शुकर आ सोम दिन लहान हटिया लागै छै । पडरिया गामके अधिकाँश महिलासब लहान हटियामे चाउर ( चामल) के व्यापार कैर रहल छै । व्यापारके शिलशिलामे मैया हटियाके दिन बजार ग्याल हेतै सोइचके बेसी त नै लेकिन कहियो काल कोइ कोइ  विदेशी युवासब घरबालाके फोन करै ।  आनआन दिन फोन आबै सब साथ मिलके बात करै त ठिकेे आ जौ हटिया दिन फोन करै घरवाली से एसगर बात कैर लै त घरमे बबाल मचै । सौससुन हमरा पुछे आबै बिदेशसे हमर बौवाके फोन एल रहै कनिया ? हमर पुतौह कोन  कोन बात करलकै  ? हम कि कहु ? कहित रहियै फोन दया देलयौ आ हम कात चैल गिलियौ हमरा कि पता कोन बात करलकौ कैहके बात टाइल दैत रहियै ।

हमर मनमे हजार प्रश्न उबजै । मने मन सोचियै केहेन जिन्दगी छै बिदेशीयाके घरवालीके । घरवला बिदेश, पैसा सौस-ससुर चलाइछै । कुछो किनैयोके मन हैत हेतै त सौस- ससुरसे माँग । पैसा त पैसा ! सुख दुख त दुरके बात ! भोइर मन बातो करैले नै पाबैछै । बिदेशीयाके घरवालीके एहेन जिवन ।  फिर भि महिलासब आपन जिवन बिताइ छै । लेकन अखैनका कनियाके हाथ हाथमे मोबाइल फोन छै राइत दिन जखैन मन लागैछै समय मिल्याके बात करै छै । देेखते देखते सुबिधा परिवर्तन भेलै ।

सैब कोइमे लागु नै हैछै ताबो एहेन समस्याके चाङ छै । कतेक पुरुष महिलाके लेल बिदेशमे दुख, कष्टकर जिवन बिताबै छै आ महिला कटा पैसाके ,कटा पैसा नै बुइझ उडाइलक । कतेक महिला सबटा कटा पैसा, गरगहना ल्याके दोसर पुरुषसँगे टाप कैस दैछै । पुरुषके दुख कैरके कम्याल कटा लेलक आ दोसर पुरुषसँगे भाइग गेल ।  महिला, पुरुषके आपने-आपने अलगे-अलगे कथा बेथा । पुरुष जाइतके अलगे चिनता नेपालमे रहे आर्थिक चाप बिदेेश जाई घरनी टाप ।

समाज रूपान्तरण, परिवर्तन, बदलाबके लेल  युवासब देशके ताकत चियै । युवासब आपन जीवनके उर्वर समय, उर्जा , सृजनात्मक क्षमता आब देश भितर उद्योग केन्द्रित उत्पादनमे प्रयोग करे परतै । आपन सिप, कला, अध्ययन, अनुसन्धान मार्फत रोजगारी सिर्जना करैके  योजनामे लगाबै दिसन  देश बनाबैबला लबका सरकारके ध्यानाकर्षण हेबे  !